Jan 7, 2010

उन्हे तो फ़ुर्सत नही मिलने की हमसे

उन्हे तो फ़ुर्सत नही मिलने की हमसे, और हमारा वक़्त गुज़रता है उनकी फरियाद करके.
अगर आए वो मेरी मौत पे, तो कह देना अभी सोए हैं तुम्हे याद करके


इतनी छ्होटी नहीं दोस्ती अपनी, कैसे सोच लिया क किनारा आ गया.
लो हो गयी मोबाइल में रोशनी, और स्मस हमारा आ गया....


हमारी दोस्ती रेमंड जैसी नही सिन्स1965, पेप्सी जैसी नही यह दिल माँगे मोरे,
यह होगी लीक जैसी, ज़िंदगी क साथ भी, ज़िंदगी क बाद भी..

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