Mar 16, 2010

शायरी : अब आंसुओ को आँखों मैं सजाना होगा

अब आंसुओ को आँखों मैं सजाना होगा
चीराग बुझ गई खुद को जलाना होगा

ना समझना की तुमसे बिछड़ के खुश हैं
हमे लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा

फिर शाम ढाल गई तुम आइये ना आज भी
दिल को आज फिर उम्मीदों से बहलाना होगा

वादा खिलाफी कर के मुस्कुराते हो आप
देखना एक दिन सनम आपको पछताना होगा

लहू से अपने कफ़न पे तेरा नाम लिख जाउंगी
थाम के हाथ में फूल तुमको आना होगा

अभी से ना कीजिये  तकाज़-ए-मसरूफ़ियत की आप
अभी उठाना है जनाज़ा कन्धा तो देना होगा

मुद्दतो किया है तेरा इंतिज़ार ऐ सनम
उमर कट चुकी अब तो जाना होगा

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