इकरार में शब्दों की अहमियत नही होती,
दिल के जज़्बात की आवाज़ नही होती,
आँखें बयान कर देती हैं दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ़्ज़ों की मोहताज़ नही होती!
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कितना भी चाहो ना भुला पाओगे
कितना भी चाहो ना भूल पाओगे
हम से जितना दूर जाओ नज़दीक पाओगे
हूमें मिटा सकते हो तो मिटा दो
यादें मेरी, मगर..
क्या सपनो से जुडा कर पाओगे हमे
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