यादों की परछाई में अब तो आए तेरा ही सेहरा
तू अभी तक इस बात से है अंजान मैं हू दीवाना तेरा
इज़हार-ए-मोहबात करने तो बहुत बार सोचा मैने
पर हर बार तेरे ही अक्स ने रोका है रास्ता मेरा
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ना चाहो किसी को इतना की चाहत आपकी मजबूरी बन जाए,
चाहो किसी को इतना आपका प्यार उसके लिए ज़रूरी बन जाए
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सभी नगमे साज़ में गाये नही जाते,
सभी लोग महफ़िल में बुलाए नही जाते,
कुछ पास रह कर भी याद नही आते,
कुछ दूर रह कर भी भूलाए नही जाते...
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